अभिज्ञान शाकुंतलम

जलजला वहां,फट पड़ा ज्वालामुखी वहाँ
बयार थी वो,चल पड़ीं तो चल पड़ी।
क्या हुआ,जो सांझ के बाद आज फिर एक सांझ
कल भी वह सांझ आएगी देखना ये सांझ आएगी
रात भी हर रोज आती ही रहेगी....
कुछ महसूस किया क्या?
आप ठिठक गए,ये क्या पूछ लिया
हवा के थपेड़े जिंदगी को जिंदा हैं आप
कानो में जैसे कह दिया जाता है।

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