निर्भार्यता

आंखों को देखने को स्वच्छंद छोड़ा क्या ?
ऐसे ही कान,नाक,जीभ....स्वच्छंद..क्या ?
एक नहीं,अनेक दबाव डाल रखा है मन ने
मानो इनकी अपनी कोई हस्ती ही नहीं !
बंधी गाय बीमार होती है,जो चरने नही जाती
पूर्ण स्वतंत्रता,भयमुक्त जीवन,मुक्तिमार्ग है!

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