स्वप्न की गाथा
में पूरे परिवार के साथ ही था ऐसा पता लग रहा था,पर में भी खुद को एक पल के लिए भी देख न पाया। विमान उड़ता जा रहा था....सहंसः एक हाथ और एक आवाज कपित के अंदर...बरमूडा ट्राइंगल आ गया हो जैसे.....फिर चाबी खींच ली गाइड,विमान नीचे आ गया पर सही सलामत और एक बस की तरह छक्के पर लुढ़कता चला गया फिर स्थिर भी हो गया,एक टक्कर सभी यात्री उतर गए....समान की परवाह किसे थी? जान लेकर उतर गए।
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