नाम
नाम से लगाव सभी लोगों को होता है,सुधांशु त्रिवेदी जी को कहते सुना किसी चैनल पर वे अन्तर्यात्रा को समझाने की कोशिश कर रहे थे....कहना था उनका- अंतर्यात्रा में जोखिम होता है,कोई सड़क और प्रकाश साथ नहीं होता, धुप्प अंधेरे में हिम्मत के साथ यह यात्रा चलती है और सोना,चांदी औऱ बहुत कुछ मुफ्त में प्राप्त होता चलता है,इस यात्रा पर जाने की हिम्मत प्रायः नहीं कर पाता है इंसान और उसकी जिंदगी बनी बनाई सड़क पर पृथ्वी की परिक्रमा करते निकल जाती है जिस परिक्रमा में हम प्रायः सबकुछ खरीदते ही रहते हैं और कमाने की फिक्र हमेशा कायम रहती है !
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