स्वप्न की कहानियाँ-1
वह और उसका बच्चा पति के इंतजार में या फिर बच्चा भी पिता के लिए इंतजार करता हुआ मालूम पड़ा, गहरी रात्रि,लोगों ने शायद बता दिया आपका बेटा 3 महीने का हो गया है.....गांव का घर ,कच्छ घर ,मशहरी लगी हुई वसु सोई थी,उसे पति के आने का भान नहीं था।
बच्चे से मिलना हुआ,सान्निध्य ने शारीरिक प्यास जग दी,रात्रि का चौथा प्रहर आरम्भ होनेवाला ही था,घर की दो अन्य महिला भी सो रही थी,मशहरी के दूसरी ओर पता न चला था पति को पर महिलाओं को भान हुआ, पत्नी को तो पता था ही,बच्चे को पुचकारते हुए कहने लगी-देखो,देखो पापा आए हैं...फिर क्या था एक एक कर दोनों कमरे से बाहर हो गई....दरवाजे के खुले होनेपर एक युवक दीदी दीदी करता अंदर आयरन ढूंढने कमरे में पहुंच गया फिर जीजा,जीजा बोलकर बातें करने लगा,कौन समझाए निपट बुद्ध को....जम गया वहीं आयरन करने,बड़े बुजुर्गों को उसके जगे होने का भान न रहा होगा....पत्नी शर्म से गड़ी जा रही थी कुछ अरमान थे,अंतरंग पलों की अपेक्षा थी,पति ने ताड़ते हुए कहा दिया-वशु मुझे और कुछ की आशा नहीं है बस इतना ही साथ काफी है।
वह बेटे के साथ खेल खेलकर गिनती सीखाने का ढोंग करने लग गई ताकि झेंप मिटता रह सके,वैसे झेंपने वाली ही तो बात थी।
नकुल से न रहा गया,कह उठा,बहुत थक चुका हूं आते आते शाले साहब अब जरा सोना चाहता हूँ, जरा तुम शीघ्रता करो,निपटाओ अपना आयरन और मुझे सो जाने दो....कैसे कहता कि अब मुझे अपनी पत्नी और बच्चे के साथ अंतरंग कुछ पल बिताने हैं,पर उस शाले नामके जीव को कुछ समझ न आया,बोल उठा....आप सो जाओ, जाते समय पुकार लगा दूंगा
अब बच्चे के साथ नकुल भी पढ़ाई के खेल में मशगूल हो गया।
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