क्या खो गया है?(what has lost?)

कई बार,बरबस आसमान पर नजर गई और तेज गति से भागते बादल दिखाई दिए हैं, बरसात की ऋतु नजारे वाली होती है,बचपन में कागज की नाव तो आपने भी तैराया ही होगा,उत्सुकता से मेढ़क को पास के गढे में टर्र टर्र करते भी देखा ही होगा......जीवन में सब देख भाल लेते हैं......शिमला,मनाली,गंगटोक,देहरादून,दार्जिलिंग.......पर फिर भी तृप्त नहीं हुआ,ऐसा तो लगता ही रहता है.....लगता है कि कुछ खो गया है जिसे पा लेना होगा,यही इस जीवन की सार्थकता होगी।

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