अपना दिल और दिलदार का प्रेम (own heart and beloved love)
कभी कभी जानबूझकर तो कभी अनजाने ही इस जीवन के बीत चुके पलों को याद करके अच्छी अनुभूति होती है तो कभी अनायास वर्तमान की जड़ें झकझोरती हुई वहाँ लेकर जाती है जहाँ प्रेम का स्फुरण महसूस हुआ था और महसूस होता चला जा रहा है! संसार को भी बहुत चाहता आ रहा हूँ,ये चाहत की जड़ वहीं पर आज भी सिंचित है,पर है प्यासी और चिर युवा!
एकांतवासी और अनजाना बनकर रहना अछ्ह लगता है.....कोविड 19 ने वैसे भी लोगों से विमुख होने का पर्याप्त अवसर दे दिया।
Comments
Post a Comment