ऊर्जा का पूर्ण उपयोग

व्योम सदृश,व्यवधानमुक्त जीवन हर मानव की प्यास तो है,कोई दो राय तो बिल्कुल ही नहीं ! बंद आंखें आपको संसार से मुक्त कर देती है ठीक वैसे ही जैसे गाड़ी का ड्राइवर गाड़ी से उतरकर मुक्ति महसूस करने लग जाता है ! शरीर की सामर्थ्य तब पूरा उपयोग में आने लगता है जब संसार का बोध तिरोहित हो जाता है,फिर आप अपना संसार निर्मित कर पाते हैं जिसमें नित्य प्रतिदिन की जिम्मेदारियां निभती है,प्रयत्न स्वाभाविक लगाए जाते हैं और सभी कर्म निष्काम होते चले जाते हैं जैसे नई दियासलाई हल्के घर्षण से ही जल उठती है !

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