फिक्र/चिंता(worriedness)

अपना अनुभव ही लिख रहा होता हूँ,मैं आज अपनी बेफिक्री की दशा तक पहुंचने की अपनी अंतर्यात्रा को याद कर रहा हूँ जो कोई चालीस वर्ष पूर्व ही आरम्भ हुई थी,पल पल और कदम दर कदम सांसारिक यात्रा के साथ साथ अंतर्मन की यात्रा भी हर किसी का चलता ही रहता है,मेरी भी चली,चलती ही जा रही है।
जीवन को पलटकर देखता हूँ तो पता हूँ कि अतीत की याद हमें दुख देती है,भविष्य की सोच हमें फिक्र देती है,वर्तमान में डूबा रहना हमें शांत रखता है......यही शाश्वतता का नियम है!

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