शून्य (The Vacum)

लोग बाग अब बदल गए है,भागम भाग में उनकी जिंदगी प्लेटफॉर्म पर बिना रुके भागती दुरंतो या राजधानी एक्सप्रेस सदृश होती चली गई है,वापसी हो नहीं सकती। लोगों ने आसमान निहारना लगभग छोड़ ही दिया है जो एक शून्य सदृश ही तो है जिसके पेट में कितने ही वायुयान उड़ान भरते हैं,छोटी बड़ी चिड़ियाँ भी उड़ान भर्ती रहती हैं और वह भी जब मर्जी तब।
आसमान किसी को रोकता टोकता नहीं,क्या मैं भी......आसमान को अब वैसे ही देखता परखता,निहारता रहा करता हूँ जैसा बचपन के खाली दिनों में.....सचमुच बड़ा ही आनंद है जब किसी भी काम को करने का बोझ मालूम न पड़ता हो,निष्काम हो जाय सारे कर्म !

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