सौरमंडल का नेक दिल न्यायप्रिय राजा

विचारणीय तो है ही कि प्रतिदिन रात के ढलते ही एक नया दिन निकल आता है और हर नए दिन को हम सबके लिए लानेवाले सूरज दादा ही हैं; बरसात की ऋतु में जमकर बरसता पानी सूर्य के ही तो चमत्कार हैं,भगवान हैं,आराध्य हैं हमारे,बादल कस बनना,मानसून हवा का चलना झमाझम पानी का बरसना.........तप्त पृथ्वी की प्यास तृप्त होती है!
सूरज देवता हर जलाशय से टैक्स के रूप में हर पल थोड़ा थोड़ा जल खींचते रहते हैं,आपने गौर किया ?
हाँ, छप्पर फाड़कर बर्षा कद जल सूरज देवता इसलिए हम सबको दे पाते है क्योंकि वे लेना नहीं भूलते और इसप्रकार एक साईकल पूरा होता रहता है!

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