जन्मदिन(जीवन यात्रा में मील का पत्थर)

जीवन यात्रा में एक वर्ष और बढ़ गया हूँ; माँ सुमित्रा प्रसाद और पिता लाला हिरेन्द्र प्रसाद और दादी भवानी देवी एवं दादा बालमुकुंद लाल दास ने मेरे जन्म पर खूब खुशियाँ मनाई थी,हालांकि दादाजी तब इस दुनियाँ के निवासी नहीं रहे थे। दादी का साथ सन 1984 तक था।
जन्मदिन सचमुच खास मालूम होता है,कुछ बदलाव,कुछ संकल्प इस दिन लिए जांय तो वे निभते भी हैं,ईश्वर की विराट सत्ता हर पल कुछ संदेश हम सबके लिए प्रसारित करती रहती बाहरी शोर में उलझे रहने पर बहुधा सुनाई और दिखाई नहीं पड़ता है,365 दिन बाद एकबार फिर इस विषय पर कुछ लिखूंगा। अग्निपथ योजना के विरोध में पूरा भारत बंद है।
मै इस विरोध को उचित नहीं मानता हूँ !

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