जिजीविषा(जिंदा रहने की प्रबल इच्छा)
उम्र दराज, वे 73 वर्ष के हो चुके हैं,अति सरल,सौम्य, सादगी की मूरत.....मेरी दवा और मुझपर अटूट विश्वास ने हमेशा मुझे एक अच्छे डॉक्टर बनके रहने के लिए प्रेरित किया है।प्रकट में उनका और परिचय देने की आवश्यकता नहीं है।
हम सबके जीवन में ऐसे लोग आते हैं जो हमें प्रेरणा से भर देते हैं,हमारी संवेदनाओं को जगा देते है,भारतवर्ष में ऐसे लोगों की कमी नहीं है,कार्य के प्रति समर्पण,निजी स्वार्थ से दूर में इन बारीकियों में ही सत्य के दर्शन करता हूँ,आध्यात्मिक होना यही तो है,खोजते हुए हम इस जीवन को प्राप्त करते हैं,खोजना ही जिजीविषा का आधार है.....खोज हमें धैर्य,दया और विनम्रता के साथ करना प्रकृति के साथ एकाकार कर देती है,खोजते खोजते हम खो ही जाते हैं,फिर बून्द पानी की सागर में समाकर विराट सागर हो जाती है!
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