दैवीय शक्ति से ओत-प्रोत वातावरण

 दशहारा का पर्व अपने पूरे उफान पर आ गया है। आज सप्तमी है, मेरी स्वर्गीय माता श्रीमती सुमित्रा प्रसाद इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाती रहीं थी। पहला दशहारा उनके बिना ! सूनापन है पर जीवन की यही सच्चाई है, संसार में हर आनेवाला जाने के लिए ही तो आया करता है।

वातावरण भक्तिमय,संगीतमय है। चतुर्दिक सभी पंडालों में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे है।प्रायः प्रायः भजन ही बजाए जा रहे हैं।

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